18वीं सदी के मध्य में अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा बंगाल से निर्यात की जाने वाली मुख्य वस्तुएँ थीं -
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — कपास, रेशम, शोरा और अफीम
18वीं सदी के मध्य में, बंगाल मुगल साम्राज्य का सबसे समृद्ध प्रांत था और अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक संचालन का प्राथमिक केंद्र था। इस अवधि के दौरान बंगाल से मुख्य निर्यात वस्तुएँ कपास और रेशम के वस्त्र (बंगाल के विश्व-प्रसिद्ध मलमल और रेशमी कपड़े), शोरा (यूरोपीय युद्धों के दौरान बारूद निर्माण के लिए आवश्यक), और अफीम (मुख्य रूप से चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया को निर्यात) थीं। ये चार वस्तुएँ बंगाल से कंपनी के अत्यधिक लाभकारी व्यापार की रीढ़ थीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: बंगाल से ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापार (18वीं सदी के मध्य)
- कपास और रेशम के वस्त्र: बंगाल के उत्कृष्ट मलमल, रेशमी कपड़े और अन्य वस्त्र यूरोपीय और एशियाई बाजारों में सबसे मूल्यवान निर्यात थे। मुर्शिदाबाद, ढाका और कासिमबाजार जैसे शहर प्रमुख वस्त्र केंद्र थे।
- शोरा (पोटैशियम नाइट्रेट): बारूद उत्पादन में प्रयुक्त एक महत्वपूर्ण रणनीतिक वस्तु। बंगाल 18वीं सदी के बार-बार होने वाले युद्धों के दौरान यूरोप की अधिकांश शोरा आवश्यकताओं की पूर्ति करता था। कंपनी का शोरा व्यापार पर वस्तुतः एकाधिकार था।
- अफीम: मुख्य रूप से बिहार और बंगाल में उत्पादित, अफीम चीन के साथ व्यापार के लिए तेजी से महत्वपूर्ण हो गई। यद्यपि कंपनी ने 1773 में अपना अफीम एकाधिकार औपचारिक किया, लेकिन यह मध्य-सदी तक पहले से ही एक महत्वपूर्ण निर्यात था।
- व्यापार की दिशा: भारत कीमती धातुओं (सोना, चाँदी, ताँबा) का शुद्ध आयातक था क्योंकि यूरोपीय लोग भारतीय वस्तुओं के लिए सिक्कों से भुगतान करते थे। इससे विकल्प 3 गलत हो जाता है—धातुएँ भारत से बाहर नहीं, बल्कि भारत में आती थीं।
- अन्य वस्तुएँ: चीनी और नील का भी निर्यात किया जाता था लेकिन वे चार मुख्य वस्तुओं जितने प्रभावी नहीं थे। कच्ची कपास (विकल्प 1) 19वीं सदी में औद्योगीकरण के दौरान अधिक महत्वपूर्ण हो गई।
Question 2 of 3 कृषि का वाणिज्यीकरण
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