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शैल एवं खनिज Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (आरईई) और महत्वपूर्ण खनिजों के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष अन्वेषण सहित आधुनिक तकनीकी नवाचार बड़े पैमाने पर दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (आरईई) का उपयोग करते हैं।
- आरईई के खनन में चीन की हिस्सेदारी भारत के बाद सबसे अधिक है।
- भारत सरकार ने महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए एक मजबूत ढांचा स्थापित करने के लिए 2025 में नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (एनसीएमएम) लॉन्च किया।
- दुर्लभ पृथ्वी तत्व 13 धात्विक तत्वों का एक समूह है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
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कथन 1 सही है: रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) का उपयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष अनुसंधान, इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में व्यापक रूप से होता है।
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कथन 2 गलत है: REE उत्पादन में चीन पहले स्थान पर है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका दूसरे स्थान पर है। भारत दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक नहीं है।
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कथन 3 सही है: भारत सरकार ने जनवरी 2025 में नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) शुरू किया, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।
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कथन 4 गलत है: रेयर अर्थ एलिमेंट्स की संख्या 17 है, जिसमें 15 लैंथेनाइड्स के साथ स्कैंडियम और यट्रियम शामिल हैं।
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अतः कथन 1 और 3 सही हैं, इसलिए सही उत्तर (A) 1 and 3 only है।
रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) और क्रिटिकल मिनरल्स
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REEs 17 धात्विक तत्वों का समूह है, जो आधुनिक तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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क्रिटिकल मिनरल्स वे खनिज हैं जो आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं तथा जिनकी आपूर्ति सीमित होती है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: चट्टानों पर पानी के प्रभाव के संदर्भ में, चाक को बहुत पारगम्य चट्टान के रूप में जाना जाता है जबकि मिट्टी को काफी अभेद्य या कम से कम पारगम्य चट्टान के रूप में जाना जाता है।
कथन II: चाक छिद्रपूर्ण है और इसलिए पानी को अवशोषित कर सकता है।
कथन III: मिट्टी बिल्कुल भी छिद्रपूर्ण नहीं है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3
चॉक (Chalk) और क्ले (Clay) में मुख्य अंतर पारगम्यता (Permeability) का होता है। चॉक में अनेक जुड़े हुए छिद्र होते हैं, जिनसे पानी आसानी से गुजर सकता है। क्ले में भी छिद्र होते हैं, लेकिन वे बहुत छोटे होते हैं और आपस में कम जुड़े होते हैं, इसलिए पानी का प्रवाह बहुत धीमा रहता है। इसलिए कथन II सही है और कथन I की व्याख्या करता है, जबकि कथन III गलत है।
✅ कथन I सही है: चॉक एक अत्यधिक पारगम्य चट्टान है, जबकि क्ले बहुत कम पारगम्य होती है।
✅ कथन II सही है: चॉक छिद्रयुक्त (Porous) होती है और पानी को अवशोषित तथा प्रवाहित कर सकती है।
❌ कथन III गलत है: क्ले बिल्कुल भी अछिद्रयुक्त नहीं है; इसमें छिद्र होते हैं, लेकिन वे बहुत छोटे होते हैं जिससे पानी आसानी से नहीं गुजर पाता।
संक्षिप्त नोट्स: Porosity और Permeability
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Porosity (रंध्रता) का अर्थ है चट्टान या मिट्टी में छिद्रों की मात्रा।
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Permeability (पारगम्यता) का अर्थ है पानी का उन छिद्रों से गुजरने की क्षमता।
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कोई पदार्थ छिद्रयुक्त लेकिन अपारगम्य हो सकता है।
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चॉक छिद्रयुक्त और पारगम्य दोनों होती है।
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क्ले छिद्रयुक्त होती है, लेकिन लगभग अपारगम्य होती है।
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भूजल का संचय सामान्यतः Aquifers में होता है।
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सैंडस्टोन और चॉक महत्वपूर्ण जलभृत (Aquifer) चट्टानें हैं।
निम्नलिखित खनिजों पर विचार कीजिए:
- बेंटोनाइट
- क्रोमाइट
- काइनाइट
- सिलिमेनाइट
भारत में, उपर्युक्त में से किसे/किन्हें आधिकारिक रूप से प्रमुख खनिज के रूप में नामित किया गया है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — केवल 2, 3 और 4
भारत में, प्रमुख खनिज वे हैं जो खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की प्रथम अनुसूची में निर्दिष्ट हैं। बेंटोनाइट को लघु खनिज के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जबकि क्रोमाइट, काइनाइट और सिलिमेनाइट सभी प्रमुख खनिज हैं।
1. बेंटोनाइट – लघु खनिज: बेंटोनाइट एक मृत्तिका खनिज है जिसका उपयोग ड्रिलिंग मड, फाउंड्री रेत और सिविल इंजीनियरिंग अनुप्रयोगों में किया जाता है। यह लघु खनिजों के अंतर्गत सूचीबद्ध है।
2. क्रोमाइट – प्रमुख खनिज ✅: क्रोमाइट क्रोमियम का एकमात्र अयस्क है और स्टेनलेस स्टील तथा विभिन्न मिश्र धातुओं के निर्माण के लिए आवश्यक है। यह एक प्रमुख खनिज है।
3. काइनाइट – प्रमुख खनिज ✅: काइनाइट एक दुर्दम्य खनिज है जिसका उपयोग सिरेमिक और उच्च तापमान औद्योगिक अनुप्रयोगों में किया जाता है। इसे प्रमुख खनिज के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
4. सिलिमेनाइट – प्रमुख खनिज ✅: सिलिमेनाइट एक अन्य दुर्दम्य खनिज है जिसके धातुकर्म और औद्योगिक भट्टियों में अनुप्रयोग हैं। यह एक प्रमुख खनिज है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में प्रमुख बनाम लघु खनिज
| पहलू | प्रमुख खनिज | लघु खनिज |
|---|---|---|
| कानूनी ढांचा | MMDR अधिनियम, 1957 की प्रथम अनुसूची में निर्दिष्ट | MMDR अधिनियम, 1957 की द्वितीय अनुसूची में निर्दिष्ट |
| नियामक प्राधिकरण | केंद्र सरकार | राज्य सरकार |
| उदाहरण | क्रोमाइट, काइनाइट, सिलिमेनाइट, कोयला, लौह अयस्क, मैंगनीज, सोना, हीरा | बेंटोनाइट, चूना पत्थर (सीमेंट को छोड़कर), निर्माण पत्थर, बजरी, रेत, मिट्टी |
| रणनीतिक महत्व | उच्च आर्थिक और औद्योगिक महत्व | स्थानीय महत्व, निर्माण सामग्री |
| संख्या | 64 खनिज सूचीबद्ध | राज्य अधिसूचना के अनुसार भिन्न |
- दुर्दम्य खनिज: काइनाइट और सिलिमेनाइट एल्यूमीनियम सिलिकेट खनिज हैं जिनमें उच्च ऊष्मा प्रतिरोध होता है, जो दुर्दम्य (ऊष्मा-प्रतिरोधी) सामग्री के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- भारत में क्रोमाइट: भारत में महत्वपूर्ण क्रोमाइट भंडार हैं, मुख्य रूप से ओडिशा में (राष्ट्रीय भंडार का लगभग 98%)।
- MMDR संशोधन 2015: प्रमुख खनिजों के लिए नीलामी तंत्र के माध्यम से खनिज आवंटन में अधिक पारदर्शिता प्रदान की गई।
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