कोयले के बड़े भंडार होने के बावजूद, भारत लाखों टन कोयला क्यों आयात करता है?
- यह भारत की नीति है कि वह अपने कोयला भंडार को भविष्य के लिए बचाए और वर्तमान उपयोग के लिए अन्य देशों से आयात करे।
- भारत में अधिकांश बिजली संयंत्र कोयला आधारित हैं और वे देश के भीतर से कोयले की पर्याप्त आपूर्ति प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं।
- इस्पात कंपनियों को बड़ी मात्रा में कोकिंग कोयले की आवश्यकता होती है जिसे आयात करना पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: भारत की भविष्य के उपयोग हेतु घरेलू कोयला संरक्षण की कोई नीति नहीं है; आयात आपूर्ति-मांग अंतर और गुणवत्ता बाधाओं के कारण होता है, रणनीतिक भंडारण के कारण नहीं।
✅ कथन 2 – सही: कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों को अपर्याप्त घरेलू उत्पादन, रसद अवरोधों (रेल परिवहन बाधाएं), और उपलब्ध एवं आवश्यक कोयला ग्रेड के बीच गुणवत्ता बेमेल के कारण कमी का सामना करना पड़ता है।
✅ कथन 3 – सही: भारत के इस्पात उद्योग को ब्लास्ट भट्टियों के लिए उच्च-ग्रेड कोकिंग कोयले (धातुकर्मीय कोयला) की आवश्यकता होती है; प्रमुख कोकिंग कोयले के घरेलू भंडार नगण्य हैं, जिससे मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और इंडोनेशिया से आयात आवश्यक हो जाता है।
Question 4 of 4 ऊर्जा क्षेत्र
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