निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) भारत सरकार द्वारा स्थापित पहला नियामक निकाय है।
- PNGRB के कार्यों में से एक गैस के लिए प्रतिस्पर्धी बाजार सुनिश्चित करना है।
- PNGRB के निर्णयों के विरुद्ध अपील विद्युत के लिए अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) की स्थापना 2006 में हुई थी, यह भारत का पहला नियामक निकाय नहीं है। इसका प्रमुख उद्देश्य गैस के लिए प्रतिस्पर्धी बाजार सुनिश्चित करना और उपभोक्ता हितों की रक्षा करना है। PNGRB के निर्णयों के विरुद्ध अपीलें PNGRB अधिनियम, 2006 की धारा 30 के अनुसार विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में सुनी जाती हैं।
❌ कथन 1 – गलत: PNGRB (2006) पहला नियामक निकाय नहीं है; SEBI (1992), TRAI (1997) और अन्य पहले स्थापित किए गए थे।
✅ कथन 2 – सही: PNGRB अधिनियम, 2006 के अनुसार PNGRB का उद्देश्य गैस के लिए प्रतिस्पर्धी बाजार को बढ़ावा देना है।
✅ कथन 3 – सही: PNGRB अधिनियम, 2006 की धारा 30 के तहत PNGRB के निर्णयों के विरुद्ध अपीलें विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में जाती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: PNGRB और नियामक निकाय
| नियामक निकाय | स्थापना वर्ष | शासी अधिनियम/क़ानून | अपीलीय प्राधिकरण |
|---|---|---|---|
| SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) | 1992 (वैधानिक दर्जा) | SEBI अधिनियम, 1992 | प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) |
| TRAI (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) | 1997 | TRAI अधिनियम, 1997 | दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (TDSAT) |
| CERC (केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग) | 1998 | विद्युत नियामक आयोग अधिनियम, 1998 (बाद में विद्युत अधिनियम, 2003) | विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) |
| PNGRB (पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड) | 2006 | PNGRB अधिनियम, 2006 | विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) |
- PNGRB के कार्य: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की शोधन, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण, विपणन और बिक्री को विनियमित करना; प्रतिस्पर्धी बाजार सुनिश्चित करना; उपभोक्ता हितों की रक्षा करना।
- APTEL: विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 110 के तहत स्थापित; PNGRB के लिए भी अपीलीय प्राधिकरण के रूप में कार्य करता है।
- प्रथम नियामक निकाय का संदर्भ: भारत की नियामक संरचना 1990 के दशक में उदारीकरण के बाद विकसित होना शुरू हुई; SEBI सबसे पहले क्षेत्र-विशिष्ट नियामकों में से एक था।
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