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कृषि चुनौतियाँ एवं सुधार Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for कृषि चुनौतियाँ एवं सुधार with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित कृषि पद्धतियों पर विचार कीजिए:
- समोच्च बंधन (Contour bunding)
- सतत फसल (Relay cropping)
- शून्य जुताई (Zero Tillage)
वैश्विक जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में, उपर्युक्त में से कौन-सा/से मृदा में कार्बन पृथक्करण/संचयन में सहायता करता है/करते हैं?
Detailed Explanation:
कार्बन पृथक्करण वायुमंडलीय CO₂ को पकड़कर मृदा कार्बनिक पदार्थ में संचित करने की प्रक्रिया है, जो जलवायु परिवर्तन को कम करने में सहायक है।
✅ समोच्च बंधन: ढलानों पर मृदा अपरदन रोकता है, कार्बनिक पदार्थ और नमी बनाए रखता है, मृदा में कार्बन संचयन बढ़ाता है।
✅ सतत फसल: पहली फसल की कटाई से पहले दूसरी फसल बोकर निरंतर मृदा आवरण बनाए रखती है, मृदा क्षति कम करती है, जैवभार वापसी और कार्बन पृथक्करण बढ़ाती है।
✅ शून्य जुताई: मृदा क्षति समाप्त करती है, मृदा संरचना संरक्षित करती है, कार्बनिक पदार्थ प्रतिधारण और सूक्ष्मजैविक गतिविधि बढ़ाती है, कार्बन संचयन में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
तीनों पद्धतियाँ मृदा में कार्बन पृथक्करण में सहायक हैं।
निम्नलिखित में से 'मिश्रित कृषि' की मुख्य विशेषता क्या है?
Detailed Explanation:
मिश्रित कृषि एक कृषि प्रणाली है जिसमें फसल उत्पादन और पशुपालन एक ही फार्म पर एक साथ किए जाते हैं।
पशु फसलों के लिए खाद प्रदान करते हैं जबकि फसलें पशुओं के लिए चारा प्रदान करती हैं, जो एक एकीकृत कृषि प्रणाली बनाती है; यह मिश्रित फसल (एक साथ कई फसलें उगाना) या फसल चक्रण (क्रमिक रोपण) से अलग है।
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