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प्रशासन Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for प्रशासन with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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मध्यकालीन भारत के निम्नलिखित शासकों में से किसने पुर्तगालियों को भटकल में एक किला बनाने की अनुमति दी थी?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ कृष्णदेवराय
विजयनगर साम्राज्य के महान शासक कृष्णदेवराय ने पुर्तगालियों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखे। 1510 में उन्होंने पुर्तगाली गवर्नर अल्फोंसो द अल्बुकर्क को भटकल में एक किला बनाने की अनुमति दी। इससे व्यापारिक और सामरिक संबंध मजबूत हुए।
✅ कृष्णदेवराय सही हैं: उन्होंने व्यापार और सहयोग बढ़ाने के लिए पुर्तगालियों को भटकल में किला बनाने की अनुमति दी।
❌ नरसिंह सालुव गलत हैं: उनके शासनकाल में पुर्तगालियों का प्रभाव अभी प्रारंभिक अवस्था में था।
❌ मुहम्मद शाह III गलत हैं: उनके शासनकाल में पुर्तगाली भारत नहीं पहुंचे थे; वे 1498 में आए।
❌ यूसुफ आदिल शाह गलत हैं: उनके और पुर्तगालियों के बीच विशेषकर गोवा को लेकर संघर्षपूर्ण संबंध थे।
संक्षिप्त नोट्स: विजयनगर साम्राज्य और पुर्तगाली
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1498 में वास्को-दा-गामा कालीकट पहुंचा।
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कृष्णदेवराय (1509–1529) तुलुव वंश के सबसे महान शासक थे।
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1510 में अल्फोंसो द अल्बुकर्क ने गोवा पर कब्जा किया।
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भटकल कर्नाटक तट का एक महत्वपूर्ण बंदरगाह था।
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विजयनगर पुर्तगालियों से घोड़े, हथियार और विलासिता की वस्तुएँ प्राप्त करता था।
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कृष्णदेवराय ने अमुक्तमाल्यदा नामक तेलुगु ग्रंथ की रचना की।
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उनके शासनकाल में विजयनगर साम्राज्य अपनी चरम शक्ति पर पहुंचा।
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1565 के तालीकोटा युद्ध के बाद साम्राज्य का पतन शुरू हुआ।
विजयनगर साम्राज्य के निम्नलिखित शासकों में से किसने तुंगभद्रा नदी पर एक विशाल बांध और नदी से राजधानी शहर तक कई किलोमीटर लंबी नहर-सह-जलसेतु का निर्माण करवाया?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — देवराय प्रथम
विजयनगर साम्राज्य के देवराय प्रथम (शासनकाल 1406-1422 ई.) ने लगभग 1410 ई. में तुंगभद्रा नदी पर एक विशाल बांध/बैराज का निर्माण करवाया और राजधानी विजयनगर तक पानी लाने के लिए 24 किमी लंबी नहर-सह-जलसेतु का निर्माण करवाया। इस स्मारकीय सिंचाई परियोजना ने साम्राज्य में अपार समृद्धि लाई, जैसा कि पुर्तगाली यात्री फर्नाओ नूनिश (नूनिज) द्वारा दर्ज किया गया है, जिन्होंने देवराय प्रथम की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का विस्तृत विवरण दिया। ये जल-विज्ञान कार्य विजयनगर साम्राज्य की उन्नत इंजीनियरिंग क्षमताओं के प्रमाण हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: विजयनगर साम्राज्य - प्रमुख शासक और योगदान
| शासक | वंश | काल | प्रमुख योगदान |
|---|---|---|---|
| हरिहर प्रथम और बुक्का प्रथम | संगम | 1336-1377 ई. | विजयनगर साम्राज्य के संस्थापक |
| देवराय प्रथम | संगम | 1406-1422 ई. | तुंगभद्रा बांध और 24 किमी जलसेतु; सैन्य सुधार; मुस्लिम तीरंदाजों की नियुक्ति |
| देवराय द्वितीय | संगम | 1422-1446 ई. | संगम वंश का महानतम शासक; गजपतियों को पराजित किया; अब्दुर रज्जाक की यात्रा |
| कृष्णदेवराय | तुलुव | 1509-1529 ई. | विजयनगर का महानतम शासक; बहमनियों को पराजित किया; हजारा राम मंदिर निर्माण; अष्टदिग्गजों का संरक्षण |
| अच्युतराय | तुलुव | 1529-1542 ई. | कृष्णदेवराय के भाई; मंदिर निर्माण |
विजयनगर के शासक कृष्ण देव की कराधान प्रणाली के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भूमि पर कर की दर भूमि की गुणवत्ता के आधार पर निर्धारित की गई थी।
- कार्यशालाओं के निजी मालिक उद्योग कर देते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
✅ कथन 1 – सही: कृष्ण देव राय के प्रशासन ने एक व्यवस्थित भू-राजस्व प्रणाली लागू की थी जिसमें कर की दरें भूमि की गुणवत्ता, उर्वरता और सिंचाई सुविधाओं के अनुसार भिन्न थीं। अधिक उत्पादक और अच्छी तरह से सिंचित भूमि पर उच्च दरों पर कर लगाया जाता था, जबकि कम उपजाऊ भूमि पर कम शुल्क लगता था। यह विभेदक कराधान समानता सुनिश्चित करता था और राजस्व संग्रह को अधिकतम करता था।
✅ कथन 2 – सही: कृष्ण देव राय के अधीन विजयनगर साम्राज्य ने कृषि से परे विभिन्न आर्थिक गतिविधियों पर कर लगाया। कार्यशालाओं और औद्योगिक प्रतिष्ठानों के निजी मालिक विशिष्ट उद्योग कर (वरि-वसूली या व्यावसायिक कर) देते थे। कारीगरों, बुनकरों, लुहारों और अन्य शिल्पकारों पर ये शुल्क राज्य के गैर-कृषि राजस्व का एक महत्वपूर्ण घटक थे।
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मध्यकालीन भारत में, 'महत्तर' और 'पट्टकिल' पदनाम किनके लिए प्रयुक्त होते थे
Detailed Explanation:
महत्तर और पट्टकिल मध्यकालीन भारत में ग्राम प्रधानों के पदनाम थे, जो स्थानीय प्रशासन और राजस्व संग्रह के लिए जिम्मेदार थे।
महत्तर गाँव का मुख्य/प्रधान ग्राम प्रधान था, जबकि पट्टकिल सहायक/अधीनस्थ ग्राम प्रधान था जो प्रशासनिक कार्यों में सहायता करता था।
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