विज्ञान में हाल के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — विभिन्न प्रजातियों की कोशिकाओं से लिए गए DNA के खंडों को जोड़कर कार्यात्मक गुणसूत्र बनाए जा सकते हैं।
यह कथन गलत है क्योंकि विभिन्न प्रजातियों से DNA खंडों को केवल जोड़कर पूर्णतः कार्यात्मक गुणसूत्र बनाना वर्तमान में संभव नहीं है। गुणसूत्र अत्यधिक जटिल संरचनाएं हैं जिनके लिए प्रजाति-विशिष्ट नियामक तत्वों, सेंट्रोमियर, टेलोमियर और संरचनात्मक प्रोटीन की आवश्यकता होती है जिन्हें विभिन्न जीवों से मनमाने ढंग से मिलाकर कार्यात्मक इकाइयां नहीं बनाई जा सकतीं।
✅ कथन 1 – गलत: यद्यपि सिंथेटिक गुणसूत्र और काइमेरिक DNA संरचनाएं मौजूद हैं, परंतु जटिल प्रजाति-विशिष्ट नियामक आवश्यकताओं के कारण विभिन्न प्रजातियों के खंडों को जोड़कर कार्यात्मक गुणसूत्र नहीं बनाए जा सकते।
✅ कथन 2 – सही: सिंथेटिक जीवविज्ञान प्रयोगशालाओं में कृत्रिम कार्यात्मक DNA अनुक्रमों के रासायनिक संश्लेषण को सक्षम बनाता है, जिसमें सिंथेटिक जीन और यहां तक कि संपूर्ण वायरल जीनोम शामिल हैं।
✅ कथन 3 – सही: पोलीमरेज चेन रिएक्शन (PCR) एक मानक तकनीक है जो जीवित कोशिकाओं के बाहर इन विट्रो में DNA खंडों को प्रवर्धित करती है।
✅ कथन 4 – सही: कोशिका संवर्धन और ऊतक संवर्धन तकनीकें नियमित रूप से पोषक माध्यम का उपयोग करके पौधों और जंतुओं की कोशिकाओं को प्रयोगशाला की पेट्री डिश में विभाजित और वृद्धि करने में सक्षम बनाती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: DNA प्रौद्योगिकी एवं आनुवंशिक इंजीनियरिंग
- सिंथेटिक DNA: कृत्रिम DNA अनुक्रम प्रयोगशालाओं में जीन थेरेपी और अनुसंधान सहित विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए रासायनिक रूप से संश्लेषित किए जा सकते हैं।
- PCR (पोलीमरेज चेन रिएक्शन): कैरी मुलिस द्वारा विकसित एक क्रांतिकारी तकनीक जो जीवित कोशिकाओं के बाहर विशिष्ट DNA खंडों को लाखों गुना प्रवर्धित करती है।
- कोशिका संवर्धन: कोशिकाओं को उनके प्राकृतिक वातावरण के बाहर नियंत्रित कृत्रिम परिस्थितियों में विकसित करने की तकनीक, जो जैव प्रौद्योगिकी और चिकित्सा अनुसंधान के लिए मूलभूत है।
- गुणसूत्र: हिस्टोन प्रोटीन के चारों ओर लिपटे DNA से युक्त जटिल संरचनाएं, जिनमें सेंट्रोमियर, टेलोमियर और प्रजाति-विशिष्ट नियामक तत्व होते हैं।
- काइमेरिक DNA: विभिन्न स्रोतों से अनुक्रम युक्त DNA संरचनाएं, आनुवंशिक इंजीनियरिंग में सामान्यतः उपयोग की जाती हैं, लेकिन कार्यात्मक गुणसूत्रों से भिन्न हैं।
- सिंथेटिक जीवविज्ञान: इस क्षेत्र ने सिंथेटिक बैक्टीरियल जीनोम (माइकोप्लाज्मा माइकोइड्स, 2010) बनाने जैसे मील के पत्थर हासिल किए हैं, लेकिन कार्यात्मक बहु-प्रजाति गुणसूत्र वर्तमान क्षमता से परे हैं।
Question 1 of 1 रिकॉम्बिनेंट डीएनए तकनीक
Practice PYQ questions from this topic across all years
First question in this topic
All questions in this topic completed!