भारत के इतिहास के संदर्भ में, शब्द "कुल्यवाप" और "द्रोणवाप" निरूपित करते हैं
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — भूमि का मापन
शब्द कुल्यवाप और द्रोणवाप प्राचीन भारत में, विशेष रूप से गुप्त काल के दौरान, भूमि मापन की इकाइयाँ थीं। ये मापन एक निर्दिष्ट भूमि क्षेत्र में बोने के लिए आवश्यक बीज की मात्रा पर आधारित थे—'वाप' का अर्थ है 'बोना', जबकि 'कुल्य' और 'द्रोण' अनाज के आयतन के माप थे।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्राचीन भारतीय भूमि मापन प्रणाली
| शब्द | अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| कुल्यवाप | वह भूमि क्षेत्र जिसमें बोने के लिए एक कुल्य (बड़ा माप) अनाज की आवश्यकता होती है | सामान्यतः गुप्तकालीन ताम्रपत्र अभिलेखों (दामोदरपुर पट्टिकाएँ आदि) में भूमि अनुदान और लेन-देन के रिकॉर्ड में पाए जाते हैं |
| द्रोणवाप | वह भूमि क्षेत्र जिसमें बोने के लिए एक द्रोण (छोटा माप) अनाज की आवश्यकता होती है | |
| आढवाप | वह भूमि क्षेत्र जिसमें बोने के लिए एक आढ अनाज की आवश्यकता होती है | |
| पाटक | भूमि मापन की एक अन्य इकाई |
- वाप का शाब्दिक अर्थ है 'बोना', जो दर्शाता है कि ये बीज-आधारित मापन थे
- ये इकाइयाँ एक कृषि अर्थव्यवस्था को प्रतिबिंबित करती हैं जहाँ भूमि का मूल्य उत्पादकता से जुड़ा था
- गुप्त काल (लगभग 320-550 ईस्वी) में इन मापों का उपयोग करके व्यवस्थित भूमि राजस्व प्रशासन देखा गया
- ब्राह्मणों और मंदिरों को भूमि अनुदान अक्सर इन इकाइयों का उपयोग करके दर्ज किए जाते थे
- यह प्रणाली आधुनिक क्षेत्रफल-आधारित मापों से भिन्न थी, इसके बजाय कार्यात्मक कृषि क्षमता का उपयोग करती थी
Question 1 of 2 गुप्त प्रशासन
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