भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- फतेहपुर सीकरी में बुलंद दरवाजा और खानकाह के निर्माण में सफेद संगमरमर का उपयोग किया गया था।
- लखनऊ में बड़ा इमामबाड़ा और रूमी दरवाजा के निर्माण में लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर का उपयोग किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — कोई नहीं
इन ऐतिहासिक स्मारकों के निर्माण में उपयोग की गई सामग्रियों के संबंध में दोनों कथन गलत हैं।
❌ कथन 1 – गलत: फतेहपुर सीकरी में बुलंद दरवाजा और खानकाह का निर्माण मुख्य रूप से लाल बलुआ पत्थर से किया गया था, सफेद संगमरमर से नहीं। हालांकि कुछ सजावटी तत्वों में सफेद संगमरमर की जड़ाई का काम हो सकता है, लेकिन प्रमुख सामग्री लाल बलुआ पत्थर है जो फतेहपुर सीकरी में मुगल वास्तुकला की विशेषता है।
❌ कथन 2 – गलत: लखनऊ में बड़ा इमामबाड़ा का निर्माण मुख्य रूप से लखौरी ईंटों, चूने के मोर्टार और स्टुको प्लास्टर से किया गया था, न कि लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से। रूमी दरवाजा भी इसी प्रकार ईंटों और चूने के प्लास्टर से बना है। ये संरचनाएं अवधी स्थापत्य शैली का उदाहरण हैं जो पत्थर के बजाय ईंट निर्माण पर निर्भर थी।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मुगल और अवधी स्थापत्य सामग्री
| स्मारक | स्थान | प्रमुख सामग्री | काल/शासक |
|---|---|---|---|
| बुलंद दरवाजा | फतेहपुर सीकरी | संगमरमर की जड़ाई के साथ लाल बलुआ पत्थर | अकबर (1571-1585) |
| खानकाह (सलीम चिश्ती का मकबरा) | फतेहपुर सीकरी | सफेद संगमरमर | अकबर (1580-81) |
| बड़ा इमामबाड़ा | लखनऊ | लखौरी ईंटें, चूने का मोर्टार, स्टुको | आसफ-उद-दौला (1784) |
| रूमी दरवाजा | लखनऊ | ईंटें और चूने का प्लास्टर | आसफ-उद-दौला (1784) |
| ताजमहल | आगरा | सफेद संगमरमर | शाहजहाँ (1632-1653) |
| लाल किला | दिल्ली | लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर | शाहजहाँ (1639-1648) |
Question 1 of 1 इंडो-इस्लामिक स्थापत्य
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