चम्पारण सत्याग्रह का निम्नलिखित में से कौन सा एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — भारत के राष्ट्रीय आंदोलन से किसान असंतोष का जुड़ना
चम्पारण सत्याग्रह (1917) भारत में महात्मा गांधी का सत्याग्रह का पहला बड़ा प्रयोग था, जो बिहार में नील की खेती करने वाले किसानों की शिकायतों को संबोधित करता था जिन्हें यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा दमनकारी तिनकठिया प्रथा के तहत शोषित किया जा रहा था। इस आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह था कि इसने किसानों के मुद्दों को भारत के राष्ट्रीय आंदोलन की मुख्यधारा में ला दिया, इसे एक शहरी, कुलीन वर्ग के संघर्ष से एक जन-आधारित आंदोलन में बदल दिया जिसमें ग्रामीण कृषक जनता शामिल हो गई। यह स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसने अहिंसक प्रतिरोध की शक्ति का प्रदर्शन किया और राष्ट्रीय स्तर पर गांधी के नेतृत्व को स्थापित किया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: चम्पारण सत्याग्रह (1917)
- स्थान: चम्पारण जिला, बिहार
- मुद्दा: तिनकठिया प्रथा जो किसानों को उनकी भूमि के 3/20 भाग पर नील की खेती करने के लिए बाध्य करती थी; यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा शोषण
- नेतृत्व: महात्मा गांधी, राजेंद्र प्रसाद, जे.बी. कृपलानी और ब्रज किशोर प्रसाद द्वारा समर्थित
- विधि: भारत में सत्याग्रह (अहिंसक सविनय अवज्ञा) का पहला उपयोग
- परिणाम: तिनकठिया प्रथा का उन्मूलन; जमींदारों को किसानों को धन वापस करना पड़ा
- महत्व: किसान शिकायतों से जुड़कर राष्ट्रीय आंदोलन को जन-आधारित संघर्ष में बदल दिया; गांधी के जन नेतृत्व की स्थापना की
- प्रभाव: अहिंसक तरीकों की प्रभावशीलता का प्रदर्शन किया; पूरे भारत में भविष्य के किसान आंदोलनों को प्रेरित किया
Question 1 of 1 चंपारण सत्याग्रह
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