सरकार की 'सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना' और 'गोल्ड मुद्रीकरण योजना' का/के उद्देश्य क्या है/हैं?
- भारतीय परिवारों के पास पड़े निष्क्रिय सोने को अर्थव्यवस्था में लाना
- सोने और आभूषण क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को बढ़ावा देना
- सोने के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल 1 और 3
✅ कथन 1 – सही: गोल्ड मुद्रीकरण योजना (GMS) व्यक्तियों और संस्थानों को अपना निष्क्रिय भौतिक सोना (आभूषण, सिक्के, बार) बैंकों में जमा करने की अनुमति देती है। इस सोने को पिघलाया जाता है, शुद्ध किया जाता है और औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाया जाता है, जहाँ इसे जौहरियों और सुनारों को उधार दिया जा सकता है, जिससे घरेलू सोने के भंडार का उपयोग होता है।
❌ कथन 2 – गलत: दोनों योजनाएँ घरेलू सोने की मांग और आपूर्ति के प्रबंधन पर केंद्रित हैं। ये सोने और आभूषण क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने के लिए नहीं बनाई गई हैं। FDI नीतियाँ इन घरेलू सोना प्रबंधन पहलों से अलग संचालित होती हैं।
✅ कथन 3 – सही: सोने के आयात को कम करना दोनों योजनाओं का मुख्य उद्देश्य है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना भौतिक सोने का एक वित्तीय विकल्प प्रदान करती है, जिससे आयात की मांग कम होती है। GMS जौहरियों के लिए पुनर्चक्रित घरेलू सोने की उपलब्धता बढ़ाती है, जिससे आयातित सोने की उनकी आवश्यकता कम हो जाती है। चूंकि सोने का आयात भारत के चालू खाता घाटे (CAD) को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है, ये योजनाएँ भुगतान संतुलन में सुधार करने में मदद करती हैं।
Question 7 of 10 राजकोषीय घाटा, राजस्व घाटा एवं सार्वजनिक ऋण
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