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सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी Previous Year Questions (PYQs)
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ब्लॉकचेन तकनीक की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- डेटाबेस में संग्रहीत रिकॉर्ड को परिवर्तन के जोखिम के बिना संबंधित हितधारकों के लिए दृश्यमान बनाया जा सकता है।
- संपूर्ण डेटाबेस की प्रतियां एक नेटवर्क पर कई कंप्यूटरों पर संग्रहीत की जाती हैं, सेकंड के भीतर समन्वयित होती हैं।
- कंसोर्टियम ब्लॉकचेन सार्वजनिक और निजी ब्लॉकचेन का मिश्रण है जो चयनात्मक डेटा एक्सेस की अनुमति देता है।
- गणितीय एल्गोरिदम एक बार रिकॉर्ड और स्वीकार किए जाने के बाद किसी भी डेटा को बदलना या हटाना असंभव बना देते हैं।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 सही है: ब्लॉकचेन की वास्तुकला प्रासंगिक हितधारकों के साथ डेटा को पारदर्शी रूप से साझा करने की अनुमति देती है। क्योंकि खाता बही केवल परिशिष्ट है और नेटवर्क सर्वसम्मति द्वारा सुरक्षित है, उपयोगकर्ता अनधिकृत परिवर्तन के जोखिम के बिना रिकॉर्ड देख सकते हैं।
कथन 2 सही है: ब्लॉकचेन एक विकेंद्रीकृत डेटाबेस (डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी) के रूप में काम करता है। संपूर्ण बहीखाता की समान प्रतियां एक नेटवर्क पर कई कंप्यूटरों (नोड्स) में संग्रहीत की जाती हैं। सत्य के एकल स्रोत को बनाए रखने के लिए ये नोड्स लगातार संचार करते हैं और तेजी से (अक्सर सेकंड के भीतर, विशिष्ट ब्लॉकचेन प्रोटोकॉल के आधार पर) सिंक करते हैं।
कथन 3 सही है: एक कंसोर्टियम ब्लॉकचेन एक हाइब्रिड मॉडल है जो सार्वजनिक (खुला) और निजी (बंद) ब्लॉकचेन दोनों की विशेषताओं को मिश्रित करता है। यह किसी एकल इकाई या खुली जनता के बजाय संगठनों के पूर्व-अनुमोदित समूह द्वारा शासित होता है, जो अर्ध-विकेंद्रीकृत नियंत्रण और चयनात्मक डेटा पहुंच की अनुमति देता है।
कथन 4 सही है: ब्लॉकचैन ब्लॉकों को जोड़ने के लिए जटिल गणितीय एल्गोरिदम (क्रिप्टोग्राफ़िक हैशिंग) का उपयोग करता है। एक बार जब डेटा नेटवर्क द्वारा रिकॉर्ड और मान्य हो जाता है, तो इसे बदलने या हटाने के लिए बाद के सभी ब्लॉकों को बदलने और बहुमत नेटवर्क नियंत्रण हासिल करने की आवश्यकता होती है, जिससे छेड़छाड़ व्यावहारिक रूप से असंभव हो जाती है।
ध्यान दें: हालांकि ब्लॉकचेन तकनीक के सिद्धांतों के आधार पर सभी चार कथन तथ्यात्मक रूप से सही हैं, लेकिन ऐसा कोई विकल्प नहीं दिया गया है जिसमें ये सभी (1, 2, 3, और 4) शामिल हों। विकल्प सी सबसे व्यापक और उपयुक्त विकल्प है क्योंकि यह कथन 1, 2 और 4 को एक वैध सेट के रूप में सही ढंग से पहचानता है।
इसलिए, सही विकल्प C है।
निम्नलिखित में से कौन सा शब्द/वाक्यांश सबसे उपयुक्त रूप से "3डी आभासी दुनिया के एक इंटरऑपरेबल नेटवर्क को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है जिसे लाखों उपयोगकर्ताओं द्वारा एक साथ एक्सेस किया जा सकता है, जो आभासी वस्तुओं पर संपत्ति के अधिकार का प्रयोग कर सकते हैं"?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3 (Metaverse)
Metaverse एक ऐसा डिजिटल नेटवर्क है जिसमें कई 3D आभासी (Virtual) दुनिया आपस में जुड़ी होती हैं। इसमें लाखों उपयोगकर्ता एक साथ प्रवेश कर सकते हैं, बातचीत कर सकते हैं और डिजिटल संपत्तियों पर स्वामित्व रख सकते हैं।
❌ Big Data Analytics – गलत: यह बड़े डेटा के विश्लेषण से संबंधित है, न कि वर्चुअल दुनिया से।
❌ Cryptography – गलत: यह डेटा और संचार को सुरक्षित बनाने की तकनीक है। यह मेटावर्स का हिस्सा हो सकती है, लेकिन मेटावर्स स्वयं नहीं है।
✅ Metaverse – सही: यह आपस में जुड़े हुए 3D वर्चुअल संसारों का नेटवर्क है जहाँ उपयोगकर्ता डिजिटल संपत्तियों का स्वामित्व रख सकते हैं।
❌ Virtual Matrix – गलत: यह इस अवधारणा के लिए प्रचलित या मान्य शब्द नहीं है।
संक्षिप्त नोट्स: मेटावर्स (Metaverse)
-
इंटरनेट पर आधारित 3D वर्चुअल दुनिया का नेटवर्क।
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VR, AR, AI और Blockchain तकनीकों का उपयोग करता है।
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उपयोगकर्ता डिजिटल अवतार (Avatar) के माध्यम से भाग लेते हैं।
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NFTs और डिजिटल संपत्ति अधिकारों का समर्थन करता है।
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मुख्य विशेषता: Interoperability (परस्पर संचालन क्षमता)।
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गेमिंग, शिक्षा, व्यापार, मनोरंजन और ऑनलाइन बैठकों में उपयोग।
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अक्सर Web 3.0 की अवधारणा से जुड़ा हुआ माना जाता है।
-
कई बड़ी तकनीकी कंपनियाँ इसके विकास में निवेश कर रही हैं।
वेब 3.0 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- वेब 3.0 प्रौद्योगिकी लोगों को अपने स्वयं के डेटा को नियंत्रित करने में सक्षम बनाती है।
- वेब 3.0 की दुनिया में, ब्लॉकचेन आधारित सोशल नेटवर्क हो सकते हैं।
- वेब 3.0 किसी निगम के बजाय उपयोगकर्ताओं द्वारा सामूहिक रूप से संचालित होता है।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
वेब 3.0 विकेंद्रीकरण, ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी और उपयोगकर्ता स्वामित्व पर निर्मित इंटरनेट की अगली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। तीनों कथन वेब 3.0 प्रौद्योगिकी की प्रमुख विशेषताओं का सही वर्णन करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: वेब 3.0 विकेंद्रीकरण के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को अपने स्वयं के डेटा को नियंत्रित करने में सक्षम बनाता है, जिससे व्यक्तिगत जानकारी को संग्रहीत और प्रबंधित करने के लिए केंद्रीकृत प्लेटफार्मों की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
✅ कथन 2 – सही: ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी वेब 3.0 के लिए मौलिक है और विकेंद्रीकृत सोशल नेटवर्क के निर्माण को सक्षम बनाती है जहां उपयोगकर्ता अपनी सामग्री और इंटरैक्शन के मालिक होते हैं।
✅ कथन 3 – सही: वेब 3.0 एक विकेंद्रीकृत मॉडल पर संचालित होता है जहां उपयोगकर्ता सामूहिक रूप से नेटवर्क को बनाए रखते हैं और नियंत्रित करते हैं, न कि किसी एकल कॉर्पोरेट इकाई द्वारा।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वेब 3.0
- परिभाषा: विकेंद्रीकरण, ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी और सिमेंटिक वेब क्षमताओं पर केंद्रित इंटरनेट सेवाओं की तीसरी पीढ़ी
- मुख्य प्रौद्योगिकियां: ब्लॉकचेन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और विकेंद्रीकृत प्रोटोकॉल
- प्रमुख विशेषताएं: उपयोगकर्ता डेटा स्वामित्व, अनुमति-रहित पहुंच, विश्वास-रहित इंटरैक्शन और टोकनीकरण
- वेब 2.0 से अंतर: वेब 2.0 केंद्रीकृत है (निगमों द्वारा नियंत्रित), जबकि वेब 3.0 विकेंद्रीकृत है (उपयोगकर्ता-नियंत्रित)
- अनुप्रयोग: विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi), NFTs, विकेंद्रीकृत स्वायत्त संगठन (DAOs), और ब्लॉकचेन-आधारित सोशल नेटवर्क
- लाभ: बढ़ी हुई गोपनीयता, डेटा सुरक्षा, सेंसरशिप प्रतिरोध और प्रत्यक्ष पीयर-टू-पीयर इंटरैक्शन
- चुनौतियां: स्केलेबिलिटी मुद्दे, उच्च ऊर्जा खपत, नियामक अनिश्चितता और उपयोगकर्ता स्वीकृति बाधाएं
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"सॉफ्टवेयर एज ए सर्विस (SaaS)" के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- SaaS खरीदार यूजर इंटरफेस को अनुकूलित कर सकते हैं और डेटा फील्ड को बदल सकते हैं।
- SaaS उपयोगकर्ता अपने मोबाइल उपकरणों के माध्यम से अपने डेटा तक पहुंच सकते हैं।
- Outlook, Hotmail और Yahoo! Mail, SaaS के रूप हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
तीनों कथन सॉफ्टवेयर एज ए सर्विस (SaaS) की विशेषताओं और उदाहरणों का सही वर्णन करते हैं। SaaS एक क्लाउड कंप्यूटिंग मॉडल है जहां सॉफ्टवेयर दूरस्थ रूप से होस्ट किया जाता है और इंटरनेट के माध्यम से एक्सेस किया जाता है, जिससे स्थानीय इंस्टॉलेशन की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
✅ कथन 1 – सही: अधिकांश SaaS प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं को यूजर इंटरफेस को अनुकूलित करने और अपनी व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार डेटा फील्ड को संशोधित करने की अनुमति देते हैं, जो होस्टेड वातावरण में लचीलापन प्रदान करता है।
✅ कथन 2 – सही: SaaS का एक मूलभूत लाभ प्लेटफॉर्म-स्वतंत्र पहुंच है, जो उपयोगकर्ताओं को मोबाइल उपकरणों सहित इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले किसी भी डिवाइस से अपने डेटा और एप्लिकेशन तक पहुंचने में सक्षम बनाता है।
✅ कथन 3 – सही: Outlook (वेब संस्करण), Hotmail और Yahoo! Mail, SaaS एप्लिकेशनों के क्लासिक उदाहरण हैं जहां ईमेल सेवाएं स्थानीय सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन की आवश्यकता के बिना इंटरनेट पर प्रदान की जाती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सॉफ्टवेयर एज ए सर्विस (SaaS)
- परिभाषा: SaaS एक क्लाउड कंप्यूटिंग सेवा मॉडल है जहां एप्लिकेशन एक सेवा प्रदाता द्वारा होस्ट किए जाते हैं और इंटरनेट पर उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध कराए जाते हैं।
- प्रमुख विशेषताएं: स्थानीय इंस्टॉलेशन की आवश्यकता नहीं, सब्सक्रिप्शन-आधारित मूल्य निर्धारण, स्वचालित अपडेट, मल्टी-टेनेंट आर्किटेक्चर और कहीं से भी पहुंच।
- लाभ: कम प्रारंभिक लागत, स्केलेबिलिटी, स्वचालित रखरखाव और अपडेट, क्रॉस-प्लेटफॉर्म संगतता और कम IT इन्फ्रास्ट्रक्चर बोझ।
- सामान्य उदाहरण: Google Workspace (Gmail, Docs, Sheets), Microsoft 365, Salesforce, Dropbox, Slack, Zoom और Adobe Creative Cloud।
- क्लाउड सेवा मॉडल: SaaS (सॉफ्टवेयर), PaaS (प्लेटफॉर्म एज ए सर्विस) और IaaS (इन्फ्रास्ट्रक्चर एज ए सर्विस) तीन मुख्य क्लाउड कंप्यूटिंग सेवा मॉडल बनाते हैं।
- सुरक्षा विचार: डेटा तृतीय-पक्ष सर्वरों पर संग्रहीत होता है, जिसके लिए प्रदाता के सुरक्षा उपायों और अनुपालन मानकों पर भरोसा आवश्यक है।
निम्नलिखित में से किस संदर्भ में "क्यूबिट" शब्द का उल्लेख किया जाता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — क्वांटम कंप्यूटिंग
क्यूबिट (क्वांटम बिट) क्वांटम कंप्यूटिंग में सूचना की मौलिक इकाई है, जो शास्त्रीय बिट के समान है। शास्त्रीय बिट्स के विपरीत जो केवल 0 या 1 अवस्था में होते हैं, क्यूबिट एक साथ दोनों अवस्थाओं के सुपरपोजीशन में मौजूद रह सकते हैं, जिससे क्वांटम कंप्यूटर कुछ विशेष समस्याओं के लिए घातीय रूप से तेज गणना कर सकते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: क्वांटम कंप्यूटिंग के मूल सिद्धांत
- क्यूबिट (क्वांटम बिट): क्वांटम सूचना की मूल इकाई जो एक साथ |0⟩ और |1⟩ अवस्थाओं के सुपरपोजीशन में मौजूद रह सकती है।
- सुपरपोजीशन: एक क्वांटम घटना जहां एक क्यूबिट माप किए जाने तक एक साथ कई अवस्थाओं में मौजूद रहती है, शास्त्रीय बिट्स के विपरीत जो निर्धारणात्मक होते हैं।
- क्वांटम एंटैंगलमेंट: क्यूबिट्स को इस प्रकार उलझाया जा सकता है कि एक की अवस्था दूरी की परवाह किए बिना दूसरे को तुरंत प्रभावित करती है।
- क्वांटम गेट्स: क्यूबिट्स में हेरफेर करने वाली क्रियाएं, शास्त्रीय कंप्यूटिंग में लॉजिक गेट्स के समान लेकिन क्वांटम गुणों का उपयोग करती हैं।
- डीकोहेरेंस: क्वांटम कंप्यूटिंग में मुख्य चुनौती जहां पर्यावरणीय हस्तक्षेप के कारण क्यूबिट्स अपने क्वांटम गुण खो देते हैं।
- अनुप्रयोग: क्रिप्टोग्राफी, औषधि खोज, अनुकूलन समस्याएं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वित्तीय मॉडलिंग।
- प्रमुख खिलाड़ी: IBM, Google, Microsoft और विभिन्न शोध संस्थान बढ़ती क्यूबिट संख्या के साथ क्वांटम कंप्यूटर विकसित कर रहे हैं।
नॉन-फंजिबल टोकन (NFTs) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- वे भौतिक संपत्तियों के डिजिटल प्रतिनिधित्व को सक्षम करते हैं।
- वे अद्वितीय क्रिप्टोग्राफिक टोकन हैं जो एक ब्लॉकचेन पर मौजूद होते हैं।
- उनका समतुल्यता पर व्यापार या विनिमय किया जा सकता है और इसलिए उनका उपयोग वाणिज्यिक लेनदेन के माध्यम के रूप में किया जा सकता है।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
नॉन-फंजिबल टोकन (NFTs) ब्लॉकचेन पर अद्वितीय क्रिप्टोग्राफिक टोकन हैं जो भौतिक या डिजिटल संपत्तियों के डिजिटल प्रतिनिधित्व को सक्षम करते हैं। हालाँकि, फंजिबल संपत्तियों के विपरीत, NFTs का समतुल्यता पर व्यापार नहीं किया जा सकता क्योंकि प्रत्येक टोकन का एक अद्वितीय मूल्य और विशेषताएँ होती हैं, जो उन्हें वाणिज्यिक लेनदेन के मानक माध्यम के रूप में अनुपयुक्त बनाती हैं।
✅ कथन 1 – सही: NFTs टोकनीकरण के माध्यम से भौतिक संपत्तियों के डिजिटल प्रतिनिधित्व को सक्षम करते हैं, जिससे अचल संपत्ति, कलाकृति, या लक्जरी वस्तुओं जैसी वास्तविक दुनिया की वस्तुओं को ब्लॉकचेन पर प्रस्तुत किया जा सकता है, जो स्वामित्व हस्तांतरण को सुविधाजनक बनाता है और धोखाधड़ी को कम करता है।
✅ कथन 2 – सही: NFTs अद्वितीय क्रिप्टोग्राफिक टोकन हैं जो ब्लॉकचेन पर विशिष्ट पहचान कोड और मेटाडेटा के साथ मौजूद होते हैं जो प्रत्येक टोकन को दूसरों से अलग करते हैं, बिटकॉइन जैसी फंजिबल क्रिप्टोकरेंसी के विपरीत।
❌ कथन 3 – गलत: NFTs परिभाषा के अनुसार नॉन-फंजिबल हैं, जिसका अर्थ है कि उनका समतुल्यता पर व्यापार या विनिमय नहीं किया जा सकता; प्रत्येक NFT की अद्वितीय विशेषताएँ और मूल्य होता है, फंजिबल संपत्तियों (फिएट मुद्रा, बिटकॉइन) के विपरीत जो विनिमय के मानक माध्यम के रूप में काम कर सकती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: नॉन-फंजिबल टोकन (NFTs)
- परिभाषा: ब्लॉकचेन पर दर्ज अद्वितीय डिजिटल पहचानकर्ता जो विशिष्ट डिजिटल या भौतिक संपत्तियों के स्वामित्व और प्रामाणिकता को प्रमाणित करते हैं
- मुख्य विशेषता: नॉन-फंजिबिलिटी का अर्थ है कि प्रत्येक टोकन अद्वितीय है और इसे एक-के-एक आधार पर प्रतिस्थापित या विनिमय नहीं किया जा सकता
- प्रौद्योगिकी: एथेरियम जैसे ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म पर निर्मित, स्वामित्व और हस्तांतरण नियमों को लागू करने के लिए स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स का उपयोग करते हुए
- अनुप्रयोग: डिजिटल कला, संग्रहणीय वस्तुएँ, गेमिंग संपत्तियाँ, आभासी अचल संपत्ति, संगीत अधिकार, और भौतिक संपत्तियों का टोकनीकरण
- क्रिप्टोकरेंसी से अंतर: क्रिप्टोकरेंसी फंजिबल (विनिमेय) होती हैं, जबकि NFTs विशिष्ट मूल्यों के साथ अद्वितीय होते हैं
- टोकनीकरण: किसी संपत्ति के अधिकारों को ब्लॉकचेन पर डिजिटल टोकन में परिवर्तित करने की प्रक्रिया
- सीमाएँ: नॉन-फंजिबिलिटी के कारण विनिमय के माध्यम के रूप में कार्य नहीं कर सकते; उच्च ऊर्जा खपत की चिंताएँ; अटकलें और अस्थिरता के मुद्दे
"ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी" के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह एक सार्वजनिक बहीखाता है जिसका निरीक्षण कोई भी कर सकता है, लेकिन जिसे कोई एकल उपयोगकर्ता नियंत्रित नहीं करता है।
- ब्लॉकचेन की संरचना और डिजाइन ऐसा है कि इसमें सभी डेटा केवल क्रिप्टोकरेंसी के बारे में ही होता है।
- ब्लॉकचेन की बुनियादी विशेषताओं पर निर्भर अनुप्रयोगों को किसी की भी अनुमति के बिना विकसित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — केवल 1 और 3
ब्लॉकचेन एक विकेंद्रीकृत, वितरित बहीखाता प्रौद्योगिकी है जहां डेटा पारदर्शी और सार्वजनिक रूप से निरीक्षण योग्य होता है, फिर भी कोई एकल इकाई नेटवर्क को नियंत्रित नहीं करती है। जबकि ब्लॉकचेन ने क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से प्रसिद्धि प्राप्त की, इसके अनुप्रयोग डिजिटल मुद्राओं से कहीं आगे आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, स्मार्ट अनुबंध, स्वास्थ्य रिकॉर्ड और अन्य क्षेत्रों तक विस्तृत हैं।
✅ कथन 1 – सही: ब्लॉकचेन एक सार्वजनिक, वितरित बहीखाते के रूप में कार्य करता है जिसका कोई भी निरीक्षण कर सकता है, लेकिन यह केंद्रीकृत नियंत्रण के बिना संचालित होता है और नोड्स के नेटवर्क द्वारा बनाए रखा जाता है।
❌ कथन 2 – गलत: ब्लॉकचेन की संरचना केवल क्रिप्टोकरेंसी डेटा तक सीमित नहीं है; यह अनुबंध, पहचान रिकॉर्ड, आपूर्ति श्रृंखला डेटा और मतदान रिकॉर्ड सहित किसी भी प्रकार की डिजिटल जानकारी को रिकॉर्ड और सत्यापित कर सकता है।
✅ कथन 3 – सही: ब्लॉकचेन की ओपन-सोर्स और विकेंद्रीकृत प्रकृति डेवलपर्स को इसकी मुख्य विशेषताओं—पारदर्शिता, अपरिवर्तनीयता और विकेंद्रीकरण—का लाभ उठाते हुए अनुप्रयोग (DApps) बनाने की अनुमति देती है, बिना किसी केंद्रीय प्राधिकरण से अनुमति की आवश्यकता के।
📝 संक्षिप्त नोट्स: ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी
- परिभाषा: एक वितरित, विकेंद्रीकृत बहीखाता जो कई कंप्यूटरों पर लेनदेन को इस तरह रिकॉर्ड करता है कि रिकॉर्ड अपरिवर्तनीय और पारदर्शी बन जाते हैं।
- मुख्य विशेषताएं: विकेंद्रीकरण (नियंत्रण का कोई एकल बिंदु नहीं), पारदर्शिता (सार्वजनिक निरीक्षण), अपरिवर्तनीयता (रिकॉर्ड को पूर्वव्यापी रूप से बदला नहीं जा सकता), सुरक्षा (क्रिप्टोग्राफिक हैशिंग)।
- संरचना: डेटा ब्लॉक में संग्रहीत होता है, प्रत्येक में लेनदेन डेटा, टाइमस्टैम्प और पिछले ब्लॉक का क्रिप्टोग्राफिक हैश होता है, जो एक श्रृंखला बनाता है।
- क्रिप्टोकरेंसी से परे अनुप्रयोग: आपूर्ति श्रृंखला ट्रैकिंग, स्मार्ट अनुबंध, डिजिटल पहचान सत्यापन, स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्रबंधन, मतदान प्रणाली, भूमि रजिस्ट्री और बौद्धिक संपदा संरक्षण।
- प्रकार: सार्वजनिक ब्लॉकचेन (अनुमति रहित, जैसे बिटकॉइन), निजी ब्लॉकचेन (अनुमति प्राप्त, प्रतिबंधित पहुंच), और हाइब्रिड ब्लॉकचेन (दोनों का संयोजन)।
- सहमति तंत्र: प्रूफ ऑफ वर्क (PoW), प्रूफ ऑफ स्टेक (PoS), प्रैक्टिकल बीजान्टिन फॉल्ट टॉलरेंस (PBFT), और अन्य लेनदेन वैधता पर नेटवर्क सहमति सुनिश्चित करते हैं।
दृश्य प्रकाश संचार (Visible Light Communication - VLC) प्रौद्योगिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?
- VLC विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम तरंगदैर्घ्य 375 से 780 nm का उपयोग करता है।
- VLC को लंबी दूरी के ऑप्टिकल वायरलेस संचार के रूप में जाना जाता है।
- VLC ब्लूटूथ की तुलना में अधिक मात्रा में डेटा तेजी से प्रसारित कर सकता है।
- VLC में कोई विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप नहीं होता है।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल 1, 3 और 4
दृश्य प्रकाश संचार (VLC) एक ऑप्टिकल वायरलेस संचार प्रौद्योगिकी है जो डेटा संचरण के लिए दृश्य प्रकाश स्पेक्ट्रम का उपयोग करती है। कथन 1, 3 और 4 VLC की विशेषताओं का सही वर्णन करते हैं, जबकि कथन 2 इसे लंबी दूरी के संचार के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत करता है।
✅ कथन 1 – सही: VLC दृश्य प्रकाش स्पेक्ट्रम की 375 nm (बैंगनी) से 780 nm (लाल) की सीमा में काम करता है, जो विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के अंतर्गत आता है।
❌ कथन 2 – गलत: VLC एक लघु-दूरी की ऑप्टिकल वायरलेस संचार प्रौद्योगिकी है, जो आमतौर पर एक कमरे या दृष्टि-रेखा क्षेत्रों के भीतर की दूरी तक सीमित होती है, लंबी दूरी का संचार नहीं।
✅ कथन 3 – सही: VLC ब्लूटूथ की तुलना में काफी तेज डेटा संचरण गति प्राप्त कर सकता है, जिसमें ब्लूटूथ के अधिकतम लगभग 50 Mbps की तुलना में कई Gbps तक की संभावित गति होती है।
✅ कथन 4 – सही: चूंकि VLC रेडियो आवृत्तियों के बजाय प्रकाश तरंगों का उपयोग करता है, यह विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप (EMI) उत्पन्न नहीं करता है या इससे प्रभावित नहीं होता है, जो इसे अस्पतालों और विमानों जैसे संवेदनशील वातावरण के लिए उपयुक्त बनाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: दृश्य प्रकाश संचार (VLC)
- प्रौद्योगिकी आधार: मानव आंख को अगोचर तीव्र प्रकाश तीव्रता मॉड्यूलेशन के माध्यम से डेटा संचारित करने के लिए LED बल्बों का उपयोग करता है
- स्पेक्ट्रम सीमा: 375-780 nm तरंगदैर्घ्य (दृश्य प्रकाश स्पेक्ट्रम) में संचालित होता है
- गति: 100 Mbps से लेकर कई Gbps तक की डेटा दरें प्राप्त कर सकता है, जो WiFi और ब्लूटूथ से बहुत तेज है
- सीमा: लघु-दूरी की प्रौद्योगिकी, आमतौर पर दृष्टि-रेखा स्थितियों में 10 मीटर के भीतर प्रभावी
- लाभ: कोई विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप नहीं, उच्च सुरक्षा (प्रकाश दीवारों को भेद नहीं सकता), ऊर्जा कुशल, मौजूदा LED बुनियादी ढांचे का उपयोग करता है
- सीमाएं: दृष्टि-रेखा की आवश्यकता होती है, परिवेशी प्रकाश से प्रभावित होता है, अपारदर्शी वस्तुओं के माध्यम से काम नहीं कर सकता
- अनुप्रयोग: इनडोर नेविगेशन, पानी के नीचे संचार, संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षित डेटा स्थानांतरण, वाहन-से-वाहन संचार
- Li-Fi: एक संबंधित प्रौद्योगिकी जो उच्च गति वायरलेस इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए VLC का उपयोग करती है
संचार प्रौद्योगिकियों के संदर्भ में, LTE (Long-Term Evolution) और VoLTE (Voice over Long-Term Evolution) के बीच क्या अंतर है/हैं?
- LTE को सामान्यतः 3G के रूप में विपणित किया जाता है और VoLTE को उन्नत 3G के रूप में विपणित किया जाता है।
- LTE केवल डेटा प्रौद्योगिकी है और VoLTE केवल वॉयस प्रौद्योगिकी है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — न तो 1 और न ही 2
LTE और VoLTE प्रौद्योगिकियों के बारे में दोनों कथन गलत हैं। LTE को 4G (3G नहीं) के रूप में विपणित किया जाता है और यह एक उच्च-गति डेटा प्रौद्योगिकी है जो सर्किट-स्विच्ड फॉलबैक के माध्यम से वॉयस का भी समर्थन कर सकती है, जबकि VoLTE केवल वॉयस नहीं है बल्कि यह समान 4G LTE डेटा नेटवर्क पर एक साथ डेटा सेवाओं के साथ वॉयस कॉल सक्षम करता है।
❌ कथन 1 – गलत: LTE को सामान्यतः 4G प्रौद्योगिकी के रूप में विपणित किया जाता है, 3G के रूप में नहीं, और VoLTE वॉयस सेवाओं के लिए 4G LTE का एक उन्नयन है, उन्नत 3G नहीं।
❌ कथन 2 – गलत: LTE केवल डेटा नहीं है (यह फॉलबैक तंत्र के माध्यम से वॉयस का समर्थन कर सकता है), और VoLTE केवल वॉयस नहीं है (यह डेटा नेटवर्क पर वॉयस प्रदान करता है जबकि एक साथ डेटा उपयोग की अनुमति देता है)।
📝 संक्षिप्त नोट्स: LTE और VoLTE प्रौद्योगिकियाँ
| विशेषता | LTE (Long-Term Evolution) | VoLTE (Voice over LTE) |
|---|---|---|
| पीढ़ी | 4G प्रौद्योगिकी | उन्नत 4G प्रौद्योगिकी |
| प्राथमिक कार्य | उच्च-गति डेटा संचरण | 4G डेटा नेटवर्क पर वॉयस कॉल |
| वॉयस समर्थन | वॉयस के लिए 2G/3G पर सर्किट-स्विच्ड फॉलबैक (CSFB) | वॉयस को LTE पर डेटा पैकेट के रूप में प्रसारित किया जाता है |
| कॉल के दौरान डेटा | वॉयस कॉल के दौरान डेटा बाधित (CSFB के साथ) | एक साथ वॉयस और डेटा उपयोग |
| कॉल गुणवत्ता | मानक वॉयस गुणवत्ता | तेज कॉल सेटअप के साथ HD वॉयस गुणवत्ता |
| नेटवर्क दक्षता | वॉयस और डेटा के लिए अलग चैनल | दोनों सेवाओं के लिए एकीकृत IP-आधारित नेटवर्क |
पहनने योग्य प्रौद्योगिकी (Wearable Technology) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कार्य पहनने योग्य उपकरणों द्वारा संपन्न किया/किए जाता/जाते है/हैं?
- किसी व्यक्ति की स्थान पहचान
- किसी व्यक्ति की नींद की निगरानी
- श्रवण बाधित व्यक्ति की सहायता करना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
पहनने योग्य प्रौद्योगिकी उपकरण एकीकृत सेंसर और कनेक्टिविटी सुविधाओं के माध्यम से उल्लिखित तीनों कार्यों को करने में सक्षम हैं। आधुनिक पहनने योग्य उपकरण विभिन्न तरीकों से उपयोगकर्ताओं की सहायता के लिए GPS, बायोमेट्रिक सेंसर और ऑडियो प्रोसेसिंग क्षमताओं को संयोजित करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: GPS कार्यक्षमता वाली स्मार्टवॉच और फिटनेस ट्रैकर नेविगेशन, सुरक्षा और फिटनेस ट्रैकिंग उद्देश्यों के लिए किसी व्यक्ति की वास्तविक समय की स्थिति की पहचान और ट्रैकिंग कर सकते हैं।
✅ कथन 2 – सही: एक्सेलेरोमीटर और हृदय गति सेंसर से लैस पहनने योग्य उपकरण नींद के पैटर्न की निगरानी कर सकते हैं, जिसमें अवधि, चरण (REM, गहरी, हल्की नींद) और समग्र नींद की गुणवत्ता शामिल है।
✅ कथन 3 – सही: श्रवण यंत्र पहनने योग्य उपकरण और कुछ स्मार्टवॉच ध्वनि को बढ़ा सकते हैं और ध्वनि की स्पष्टता और आवाज़ में सुधार करके श्रवण बाधित व्यक्तियों की सहायता के लिए ऑडियो प्रोसेस कर सकते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पहनने योग्य प्रौद्योगिकी
- परिभाषा: शरीर पर पहने जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जो डेटा एकत्र करने और सेवाएं प्रदान करने के लिए सेंसर, प्रोसेसर और वायरलेस कनेक्टिविटी को शामिल करते हैं।
- सामान्य प्रकार: स्मार्टवॉच, फिटनेस ट्रैकर, स्मार्ट ग्लास, श्रवण यंत्र, स्वास्थ्य मॉनिटर, और स्मार्ट कपड़े।
- प्रमुख विशेषताएं: वास्तविक समय स्वास्थ्य निगरानी (हृदय गति, रक्त ऑक्सीजन, ECG), GPS ट्रैकिंग, सूचनाएं, गतिविधि ट्रैकिंग, और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण।
- स्वास्थ्य अनुप्रयोग: मधुमेह रोगियों के लिए निरंतर ग्लूकोज निगरानी, बुजुर्गों के लिए गिरने का पता लगाना, तनाव निगरानी, और दूरस्थ रोगी निगरानी।
- प्रौद्योगिकी घटक: सेंसर (एक्सेलेरोमीटर, जाइरोस्कोप, हृदय गति, GPS), ब्लूटूथ/Wi-Fi कनेक्टिविटी, बैटरी प्रबंधन, और सहायक मोबाइल ऐप्स।
- उदाहरण: Apple Watch, Fitbit, Google Glass, कोक्लियर इम्प्लांट, Samsung Galaxy Watch, और Garmin फिटनेस ट्रैकर।
पहचान मंच 'आधार' खुले "एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (APIs)" प्रदान करता है। इसका क्या अर्थ है?
- इसे किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में एकीकृत किया जा सकता है।
- आईरिस का उपयोग करके ऑनलाइन प्रमाणीकरण संभव है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
आधार के लिए खुले एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (APIs) की उपलब्धता डेवलपर्स और संगठनों को विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अनुप्रयोगों में आधार-आधारित प्रमाणीकरण और सत्यापन सेवाओं को एकीकृत करने में सक्षम बनाती है। यह वास्तुकला डिजाइन प्लेटफार्मों में निर्बाध एकीकरण की अनुमति देता है और बायोमेट्रिक सत्यापन सहित कई प्रमाणीकरण विधियों का समर्थन करता है।
✅ कथन 1 – सही: खुले APIs आधार को किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे स्मार्टफोन, टैबलेट, प्वाइंट ऑफ सेल (PoS) टर्मिनलों और अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों में एकीकृत करने की अनुमति देते हैं, जिससे डेवलपर्स आधार-सक्षम अनुप्रयोग बना सकते हैं।
✅ कथन 2 – सही: आधार की बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण प्रणाली आईरिस स्कैन (फिंगरप्रिंट्स और चेहरे की पहचान के साथ) का उपयोग करके ऑनलाइन प्रमाणीकरण का समर्थन करती है, जो उपलब्ध APIs के माध्यम से सुरक्षित पहचान सत्यापन को संभव बनाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: आधार और APIs
- आधार: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा बायोमेट्रिक और जनसांख्यिकीय डेटा के आधार पर सभी भारतीय निवासियों को जारी किया गया 12 अंकों का अद्वितीय पहचान नंबर।
- खुले APIs: एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस जो तीसरे पक्ष के डेवलपर्स को स्वामित्व की आवश्यकता के बिना अपने अनुप्रयोगों और उपकरणों में आधार सेवाओं को एकीकृत करने की अनुमति देते हैं।
- प्रमाणीकरण विधियाँ: आधार जनसांख्यिकीय (नाम, आयु, पता), वन-टाइम पासवर्ड (OTP), और बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट, आईरिस, चेहरे की पहचान) सहित कई प्रमाणीकरण मोड का समर्थन करता है।
- e-KYC सेवाएँ: आधार APIs बैंकिंग, टेलीकॉम और अन्य क्षेत्रों में तत्काल सत्यापन के लिए इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर (e-KYC) सेवाओं को सक्षम बनाते हैं।
- एकीकरण क्षमताएँ: APIs मोबाइल ऐप्स, वेब पोर्टल्स, ATMs, PoS उपकरणों और IoT-सक्षम उपकरणों सहित विविध प्लेटफार्मों में एकीकरण की सुविधा प्रदान करते हैं।
- सुरक्षा विशेषताएँ: सभी API लेनदेन एन्क्रिप्टेड हैं और उपयोगकर्ता गोपनीयता की रक्षा और अनधिकृत पहुँच को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हैं।
जब सुबह आपके स्मार्टफोन का अलार्म बजता है, तो आप जाग जाते हैं और इसे बंद करने के लिए टैप करते हैं जिससे आपका गीजर स्वचालित रूप से चालू हो जाता है। आपके बाथरूम में स्मार्ट मिरर दिन के मौसम को दिखाता है और आपके ओवरहेड टैंक में पानी के स्तर को भी इंगित करता है। जब आप नाश्ता बनाने के लिए अपने रेफ्रिजरेटर से कुछ किराने का सामान लेते हैं, तो यह इसमें स्टॉक की कमी को पहचानता है और ताजा किराने की वस्तुओं की आपूर्ति के लिए ऑर्डर देता है। जब आप अपने घर से बाहर निकलते हैं और दरवाजा बंद करते हैं, तो सभी लाइट, पंखे, गीजर और एसी मशीनें स्वचालित रूप से बंद हो जाती हैं। कार्यालय के रास्ते में, आपकी कार आपको आगे यातायात की भीड़ के बारे में चेतावनी देती है और एक वैकल्पिक मार्ग सुझाती है, और यदि आप किसी बैठक के लिए देर से हैं, तो यह आपके कार्यालय को तदनुसार संदेश भेजती है। उभरती संचार प्रौद्योगिकियों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा शब्द उपरोक्त परिदृश्य पर सबसे अच्छा लागू होता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — इंटरनेट ऑफ थिंग्स
यह परिदृश्य एक परस्पर जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र का वर्णन करता है जहां रोजमर्रा के उपकरण (स्मार्टफोन, गीजर, स्मार्ट मिरर, रेफ्रिजरेटर, कार, आदि) स्वायत्त रूप से एक-दूसरे के साथ संचार करते हैं, नेटवर्क पर डेटा का आदान-प्रदान करते हैं, और प्रत्यक्ष मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता के बिना ट्रिगर्स के आधार पर स्वचालित कार्य करते हैं। यह इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) की परिभाषित विशेषता है, जो सेंसर, सॉफ्टवेयर और नेटवर्क कनेक्टिविटी से युक्त भौतिक वस्तुओं को डेटा एकत्र करने और आदान-प्रदान करने के लिए जोड़ती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
❌ विकल्प 1 – बॉर्डर गेटवे प्रोटोकॉल: BGP एक राउटिंग प्रोटोकॉल है जिसका उपयोग इंटरनेट पर स्वायत्त प्रणालियों के बीच राउटिंग जानकारी का आदान-प्रदान करने के लिए किया जाता है; यह उपकरण अंतर-संचार से संबंधित नहीं है।
❌ विकल्प 3 – इंटरनेट प्रोटोकॉल: IP नेटवर्क पर पैकेट को संबोधित करने और रूट करने के लिए एक मूलभूत प्रोटोकॉल है, लेकिन वर्णित बुद्धिमान उपकरण-से-उपकरण संचार को शामिल नहीं करता है।
❌ विकल्प 4 – वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क: VPN सार्वजनिक नेटवर्क पर सुरक्षित, एन्क्रिप्टेड कनेक्शन बनाने के लिए एक तकनीक है, न कि स्मार्ट उपकरण पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम करने के लिए।
📝 संक्षिप्त नोट्स: इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)
- परिभाषा: IoT सेंसर, सॉफ्टवेयर और कनेक्टिविटी से युक्त भौतिक वस्तुओं का एक नेटवर्क है जो उन्हें स्वायत्त रूप से डेटा एकत्र करने, आदान-प्रदान करने और कार्य करने में सक्षम बनाता है।
- प्रमुख घटक: सेंसर/उपकरण, कनेक्टिविटी (वाई-फाई, ब्लूटूथ, सेल्युलर), डेटा प्रोसेसिंग प्लेटफॉर्म, और उपयोगकर्ता इंटरफेस।
- अनुप्रयोग: स्मार्ट होम (स्वचालित प्रकाश व्यवस्था, थर्मोस्टैट्स), स्मार्ट सिटी (यातायात प्रबंधन, कचरा प्रबंधन), स्वास्थ्य सेवा (पहनने योग्य स्वास्थ्य मॉनिटर), कृषि (सटीक खेती), और औद्योगिक स्वचालन।
- लाभ: बढ़ी हुई दक्षता, रीयल-टाइम निगरानी, भविष्य कहनेवाला रखरखाव, ऊर्जा संरक्षण, और उन्नत उपयोगकर्ता सुविधा।
- चुनौतियां: सुरक्षा कमजोरियां, गोपनीयता संबंधी चिंताएं, विभिन्न उपकरणों/मानकों के बीच अंतर-संचालनीयता मुद्दे, और डेटा प्रबंधन जटिलता।
- भारत में उदाहरण: स्मार्ट सिटी मिशन, सटीक कृषि पहल, कनेक्टेड वाहन, और बिजली वितरण के लिए स्मार्ट ग्रिड परियोजनाएं।
निम्नलिखित जोड़ियों पर विचार करें:
| शब्द कभी-कभी समाचारों में देखे जाते हैं | संदर्भ/विषय |
|---|---|
| 1. Belle II experiment | Artificial Intelligence |
| 2. Blockchain technology | Digital/Cryptocurrency |
| 3. CRISPR — Cas9 | Particle Physics |
ऊपर दी गई जोड़ियों में से कौन सी जोड़ी सही ढंग से सुमेलित है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर केवल 2 (विकल्प 2) है। Belle II एक कण भौतिकी (Particle Physics) प्रयोग है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित नहीं। Blockchain डिजिटल/क्रिप्टोकरेंसी की मुख्य तकनीक है। CRISPR-Cas9 एक जीन संपादन (Gene Editing) तकनीक है, कण भौतिकी से संबंधित नहीं।
Blockchain एक विकेंद्रीकृत डिजिटल लेजर तकनीक है, जिसमें लेन-देन सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से दर्ज किए जाते हैं। इसका सबसे प्रसिद्ध उपयोग Bitcoin जैसी क्रिप्टोकरेंसी में होता है, लेकिन इसका उपयोग बैंकिंग, सप्लाई चेन और डिजिटल पहचान जैसे क्षेत्रों में भी किया जाता है।
'बिटकॉइन' के संदर्भ में, जो कभी-कभी समाचारों में देखा जाता है, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- बिटकॉइन को देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा ट्रैक किया जाता है।
- बिटकॉइन पते वाला कोई भी व्यक्ति बिटकॉइन पते वाले किसी अन्य व्यक्ति से बिटकॉइन भेज और प्राप्त कर सकता है।
- ऑनलाइन भुगतान बिना किसी पक्ष को दूसरे की पहचान जाने भेजे जा सकते हैं।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
❌ कथन 1 – गलत: बिटकॉइन को केंद्रीय बैंकों द्वारा ट्रैक नहीं किया जाता है। बिटकॉइन एक विकेंद्रीकृत ब्लॉकचेन नेटवर्क पर काम करता है जिसमें केंद्रीय प्राधिकरण की निगरानी नहीं होती है। केंद्रीय बैंक बिटकॉइन लेनदेन को बनाए या मॉनिटर नहीं करते हैं।
✅ कथन 2 – सही: बिटकॉइन पते वाला कोई भी व्यक्ति बिटकॉइन पते वाले किसी अन्य व्यक्ति से बिटकॉइन भेज और प्राप्त कर सकता है। पीयर-टू-पीयर लेनदेन के लिए किसी मध्यस्थ या बैंक की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती है।
✅ कथन 3 – सही: ऑनलाइन भुगतान बिना किसी पक्ष को दूसरे की पहचान जाने भेजे जा सकते हैं। बिटकॉइन पते छद्मनामी होते हैं—ब्लॉकचेन पर केवल पते दिखाई देते हैं, उपयोगकर्ताओं की वास्तविक पहचान नहीं।
'LiFi' के संदर्भ में, जो हाल ही में समाचारों में रहा, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- यह उच्च गति डेटा संचरण के लिए प्रकाश को माध्यम के रूप में उपयोग करता है।
- यह एक वायरलेस तकनीक है और 'WiFi' की तुलना में कई गुना तेज है।
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
✅ कथन 1 – सही: LiFi (लाइट फिडेलिटी) LED बल्बों से दृश्य प्रकाश तरंगों का उपयोग करता है जो मानव आंखों को दिखाई न देने वाली तीव्र चमक के माध्यम से उच्च गति डेटा संचरण करता है।
✅ कथन 2 – सही: LiFi एक वायरलेस तकनीक है जिसकी सैद्धांतिक गति 100 Gbps से अधिक है, जो WiFi की वर्तमान अधिकतम 11 Gbps से काफी तेज है।
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