निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: भारतीय रिज़र्व बैंक के 'भुगतान प्रणाली डेटा के भंडारण' से संबंधित हालिया निर्देश, जिन्हें लोकप्रिय रूप से डेटा डिक्टैट के रूप में जाना जाता है, भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को निर्देश देते हैं कि
- वे यह सुनिश्चित करें कि उनके द्वारा संचालित भुगतान प्रणालियों से संबंधित संपूर्ण डेटा केवल भारत में स्थित किसी प्रणाली में संग्रहीत हो
- वे यह सुनिश्चित करें कि प्रणालियों का स्वामित्व और संचालन सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा किया जाए
- वे समेकित प्रणाली लेखापरीक्षा रिपोर्ट को कैलेंडर वर्ष के अंत तक भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक को प्रस्तुत करें
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
RBI का 'भुगतान प्रणाली डेटा के भंडारण' पर निर्देश (अप्रैल 2018 में जारी) मुख्य रूप से यह अनिवार्य करता है कि सभी भुगतान प्रणाली संचालकों को उनके द्वारा संचालित भुगतान प्रणालियों से संबंधित संपूर्ण डेटा को केवल भारत के भीतर स्थित प्रणालियों में संग्रहीत करना होगा। इसका उद्देश्य बेहतर पर्यवेक्षण, डेटा सुरक्षा और नियामक निगरानी सुनिश्चित करना है।
✅ कथन 1 – सही: निर्देश स्पष्ट रूप से यह अनिवार्य करता है कि संपूर्ण भुगतान प्रणाली डेटा केवल भारत में स्थित प्रणालियों में संग्रहीत किया जाना चाहिए, जिसकी अनुपालन समय सीमा मूल रूप से अक्टूबर 2018 निर्धारित की गई थी।
❌ कथन 2 – गलत: निर्देश में यह आवश्यकता नहीं है कि भंडारण प्रणालियों का स्वामित्व और संचालन सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा किया जाना चाहिए; निजी संस्थाएं भी अनुपालन कर सकती हैं बशर्ते डेटा भारत के भीतर संग्रहीत हो।
❌ कथन 3 – गलत: निर्देश में भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक को समेकित प्रणाली लेखापरीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं है; ऐसी रिपोर्टिंग आमतौर पर केवल सरकारी संस्थाओं के लिए आवश्यक होती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: RBI डेटा स्थानीयकरण निर्देश
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| आधिकारिक नाम | भुगतान प्रणाली डेटा के भंडारण का निर्देश |
| जारीकर्ता | भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) |
| जारी करने का वर्ष | अप्रैल 2018 |
| मुख्य आवश्यकता | सभी भुगतान प्रणाली डेटा केवल भारत में संग्रहीत किया जाना चाहिए |
| प्रभावित संस्थाएं | सभी भुगतान प्रणाली संचालक (घरेलू और विदेशी) |
| उद्देश्य | बेहतर डेटा सुरक्षा, पर्यवेक्षी पहुंच और नियामक निगरानी |
| अनुपालन समयरेखा | मूल रूप से 6 महीने (अक्टूबर 2018) |
| विवाद | विदेशी भुगतान कंपनियों (Visa, Mastercard, आदि) ने अनुपालन लागत और परिचालन चुनौतियों के बारे में चिंताएं उठाईं |
Question 6 of 9 भारतीय रिजर्व बैंक
Practice PYQ questions from this topic across all years
भारत में, केंद्रीय बैंक का 'अंतिम उपाय के ऋणदाता' (lender of last resort) के रूप में...
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CAR) वह राशि है जो बैंको...