भारत के वैज्ञानिकों सहित ब्रुकहेवन राष्ट्रीय प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों की एक टीम ने सबसे भारी प्रतिपदार्थ (एंटी-हीलियम नाभिक) बनाया। प्रतिपदार्थ के निर्माण का/के क्या निहितार्थ है/हैं?
- यह खनिज पूर्वेक्षण और तेल अन्वेषण को आसान और सस्ता बना देगा।
- यह प्रतिपदार्थ से बने तारों और आकाशगंगाओं के अस्तित्व की संभावना की जांच करने में मदद करेगा।
- यह ब्रह्मांड के विकास को समझने में मदद करेगा।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: प्रतिपदार्थ उत्पादन अत्यंत महंगा और अव्यावहारिक है; खनिज पूर्वेक्षण या तेल अन्वेषण में इसका कोई उपयोग नहीं है, जो भूकंपीय सर्वेक्षण और सुदूर संवेदन पर निर्भर करते हैं।
✅ कथन 2 – सही: एंटी-हीलियम-4 नाभिक की खोज अल्फा मैग्नेटिक स्पेक्ट्रोमीटर (AMS) जैसे अंतरिक्ष-आधारित प्रयोगों के लिए संदर्भ प्रदान करती है ताकि ब्रह्मांडीय किरणों में प्रतिपदार्थ खोजा जा सके, जो प्रतिपदार्थ तारों और आकाशगंगाओं के अस्तित्व की जांच में मदद करता है।
✅ कथन 3 – सही: भारी प्रतिपदार्थ नाभिकों का अध्ययन पदार्थ-प्रतिपदार्थ असमानता की पहेली को समझने में मदद करता है—क्यों महाविस्फोट ने दोनों के समान निर्माण के बावजूद पदार्थ-प्रधान ब्रह्मांड बनाया—जो प्रारंभिक ब्रह्मांड विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3 of 3 परमाणु विज्ञान की मूल बातें
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